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Saturday, 19 August 2017

एक कुली ने कैसे खड़ी कर ली 2500 करोड़ की कंपनी

एक कुली ने कैसे खड़ी कर ली 2500 करोड़ की कंपनी 

मुथु इतने गरीब परिवार में पैदा हुए थे कि स्कूल जाना भी उनके लिए दूर के सपने जैसा था। लेकिन इसके बावजूद वह आज देश के सबसे बड़े उद्योगपतियों में गिने जाते हैं।

 मृथु के पिता जमीदारों के यहां मजदूरी किया करते थे। इसलिए घर का गुजारा काफी मुश्किल से होता था। कई दिन तो ऐसे भी होता था कि उन्हें दोनों वक्त का खाना भी सही से नहीं मिलता था। 

मुथु बताते हैं कि वह भी स्कूल गए लेकिन भूखे पेट पढ़ाई नहीं हो पाती थी, इसलिए कुछ ही दिनों में उन्होंने स्कूल को अलविदा कह दिया।

हम आपको आज ऐसे शख्स के बारे में बताने जा रहे हैं जिसकी सफलता से आप प्रभावित हुए बिना नहीं रह सकेंगे। ईमानदारी, सादगी और कठिन परिश्रम की बदौलत एमजी मुथु ने आज लाखों, करोड़ों का साम्राज्य खड़ा कर लिया है। मुथु इतने गरीब परिवार में पैदा हुए थे कि स्कूल जाना भी उनके लिए दूर के सपने जैसा था। लेकिन इसके बावजूद वह आज देश के सबसे बड़े उद्योगपतियों में गिने जाते हैं।
मुथु ने एक कुली के तौर पर अपनी जिंदगी का सफर शुरू किया था। वह पोर्ट पर पानी के जहाजों से सामान उतारने चढ़ाने का काम करते थे। एमजीएम ग्रुप के संस्थापक मुथु का जन्म तमिलनाडु के एक अत्यंत गरीब परिवार में हुआ था। उनके पिता जमीदारों के यहां मजदूरी किया करते थे। इसलिए घर का गुजारा काफी मुश्किल से होता था। कई दिन तो ऐसे भी होता था कि उन्हें दोनों वक्त का खाना भी सही से नहीं मिलता था। जब मुथु 10 साल के थे तब वे गांव के बच्चों को स्कूल जाते हुए देखते थे। कई बार उन्हें भूखे पेट भी सोना पड़ता था। मुथु बताते हैं कि वह भी स्कूल गए लेकिन भूखे पेट पढ़ाई नहीं पाती थी। इसलिए कुछ ही दिनों में उन्होंने स्कूल को अलविदा कह दिया।
इतनी कम उम्र में उन्होंने अपने पिता के साथ हाथ बटाना शुरू कर दिया और उनके साथ ही मजदूरी करने लगे। लेकिन यहां उन्हें काफी कम पैसे मिलते थे इसीलिए 1957 में मुथु ने मद्रास पोर्ट पर कुली के तौर पर काम करने लगे। उनका व्यवहार काफी अच्छा था इसलिए उनकी लोगों से अच्छी खासी दोस्ती हो गई थी। उन्होंने अपनी मासिक सैलरी से ही कुछ पैसे बचाए। इन पैसों से उन्होंने बिजनेस शुरू किया। एक कुली के लिए पोर्ट का सामान उतारने के बिजनेस में कूदना काफी जोखिम भरा था, लेकिन मुथू काफी हिम्मती किस्म के व्यक्ति थे। वह काफी मेहनत करते थे और किसी को शिकायत का कोई मौका नहीं देते थे। इसी मेहनत के बल पर उन्होंने एमजीएम ग्रुप का साम्राज्य खड़ा कर लिया।
बेहतरीन सर्विसेज देने की वजह से ये कम समय में ही लॉजिस्टिक्स जगत का बड़ा नाम बन गए। आज एमजीएम कंपनी लॉजिस्टिक के मामले में देश की सबसे बड़ी कंपनियों में गिनी जाती है। लॉजिस्टिक के बाद मुथु ने खनिज की खदानों का ठेका लेना शुरू किया। उन्होंने इंटरनेशनल होटलों में भी काफी पैसा इन्वेस्ट किया। इतने कम समय में ही उन्होंने बड़ी सफलताएं अर्जित कीं। मुथु कहते हैं कि जहां चाह होती है वहां राह भी मिल जाती है। हाल ही में एमजीएम ग्रुप ने एक वोडका ब्रांड को भी खरीद लिया है जो तमिलनाडु के साथ अन्य राज्यों में भी फ़ैल रहा है. मुथू की कुल संपत्ति अब 2500 करोड़ हो चुकी है।

यदि आपके पास है कोई दिलचस्प कहानी या फिर कोई ऐसी कहानी जिसे दूसरों तक पहुंचना चाहिए, तो आप हमें लिख भेजें achiseekh@gmail.com पर। साथ ही सकारात्मक, दिलचस्प और प्रेरणात्मक कहानियों के लिए हमसे फेसबुक और ट्विटर पर भी जुड़ें...

Source : Achiseekh.com 

 


Wednesday, 5 July 2017

जीवन क्या है? – What is Life In Hindi

Life – जीवन

विलियम शेक्सपियर (William Shakespeare) ने कहा था कि जिंदगी एक रंगमंच है और हम लोग इस रंगमंच के कलाकार | सभी लोग जीवन (Life) को अपने- अपने नजरिये से देखते है| कोई कहता है जीवन एक खेल है (Life is a game), कोई कहता है जीवन ईश्वर का दिया हुआ उपहार है (Life is a gift), कोई कहता है जीवन एक यात्रा है (Life is a journey), कोई कहता है जीवन एक दौड़ है (Life is a race) और बहुत कुछ|
मैं आज यहाँ पर “जीवन” के बारें में अपने विचार share कर रहा हूँ और बताने की कोशिश करूंगा की जीवन क्या है? (What is Life)|

My Thoughts on Life in Hindi

जीवन क्या है?  – What is Life

मनुष्य का जीवन एक प्रकार का खेल है – Life is a Game और मनुष्य इस खेल का मुख्य खिलाडी|
यह खेल मनुष्य को हर पल खेलना पड़ता है|
इस खेल का नाम है “Game of Thoughts (विचारों का खेल)”|
इस खेल में मनुष्य को दुश्मनों से बचकर रहना पड़ता है|मनुष्य अपने दुश्मनों से तब तक नहीं बच सकता जब तक मनुष्य के मित्र उसके साथ नहीं है|

मनुष्य का सबसे बड़ा मित्र “विचार (thoughts)” है, और उसका सबसे बड़ा दुश्मन भी विचार (Thoughts) ही है| 
मनुष्य के मित्रों को सकारात्मक विचार (Positive Thoughts) कहते है और मनुष्य के दुश्मनों को नकारात्मक विचार (Negative Thoughts) कहा जाता है|
मनुष्य दिन में 60, 000 से 90, 000 विचारों (Thoughts) के साथ रहता है|
यानि हर पल मनुष्य एक नए दोस्त (Positive Thought) या दुश्मन (Negative Thought) का सामना करता है|
मनुष्य का जीवन विचारों के चयन (Selection of Thoughts) का एक खेल है|
इस खेल में मनुष्य को यह पहचानना होता है कि कौनसा विचार उसका दुश्मन है और कौनसा उसका दोस्त, और फिर मनुष्य को अपने दोस्त को चुनना होता है|
हर एक दोस्त (One Positive Thought) अपने साथ कई अन्य दोस्तों (Positive Thoughts) को लाता है और हर एक दुश्मन (One Negative Thought) अपने साथ अनेक दुश्मनों (Negative Thoughts) को लाता है|
इस खेल का मूल मंत्र यही है कि मनुष्य जब निरंतर दुश्मनों (Negative Thoughts) को चुनता है तो उसे इसकी आदत पड़ जाती है और अगर वह निरंतर दोस्तों (Positive Thoughts) को चुनता है, तो उसे इसकी आदत पड़ जाती है|
जब भी मनुष्य कोई गलती करता है और कुछ दुश्मनों को चुन लेता है तो वह दुश्मन, मनुष्य को भ्रमित कर देते है और फिर मनुष्य का स्वंय पर काबू नहीं रहता और फिर मनुष्य निरंतर अपने दुश्मनों को चुनता रहता है|
मनुष्य के पास जब ज्यादा मित्र रहते है और उसके दुश्मनों की संख्या कम रहती है तो मनुष्य निरंतर, इस खेल को जीतता जाता है| मनुष्य जब जीतता है तो वह अच्छे कार्य करने लगता है और सफलता उसके कदम चूमती है, सभी उसकी तारीफ करते है और वह खुश रहता है|
लेकिन जब मनुष्य के दुश्मन, मनुष्य के मित्रो से मजबूत हो जाते है, तो मनुष्य हर पल इस खेल को हारता जाता है और निराश एंव क्रोधित रहने लगता है|
मनुष्य को विचारों के चयन में बड़ी सावधानी बरतनी पड़ती है क्योंकि मनुष्य के दुश्मन, मनुष्य को ललचाते है और मनुष्य को लगता है कि वही उसके दोस्त है|
जो लोग इस खेल को खेलना सीख जाते है वे सफल हो जाते है और जो लोग इस खेल को समझ नहीं पाते वे बर्बाद हो जाते है|
इस खेल में ज्यादातर लोगों कि समस्या यह नहीं है कि वे अपने दोंस्तों और दुश्मनों को पहचानते नहीं बल्कि समस्या यह है कि वे दुश्मनों को पहचानते हुए भी उन्हें चुन लेते है|
ईश्वर (या सकारात्मक शक्तियाँ), मनुष्य को समय-समय पर कई तरीकों से यह समझाते रहते है कि इस खेल को कैसे खेलना है लेकिन यह खेल मनुष्य को ही खेलना पड़ता है| जब मनुष्य इसमें हारता रहता है और यह भूल जाता है कि इस खेल को कैसे खेलना है तो ईश्वर फिर उसे बताते है कि इस खेल को कैसे खेलना है|

————————————- यही है जीवन
Source - happyhindi.com

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Wednesday, 28 June 2017

विश्व के सबसे अमीर आदमी बिल गेट्स के बारे में चौंकाने वाले तथ्य

बिल गेट्स नाम तो सुना ही होगा, दुनिया का सबसे अमीर आदमी जो की माइक्रोसॉफ्ट का संस्थापक है। आज आपको इनके बारे में कुछ अजब-गजब बातें सुनने को मिलेगी जिनको पढ़कर आप भी हैरान हो जायेंगे।



हम अपने इस ब्लॉग पर पहले से ही अजब-गजब चीजों के बारे में लिख रहें है जो आपको पसंद आ रही हैं इसलिए आज हमने सोचा क्यों ना आपको कुछ सबसे अमीर आदमी के बारे में कुछ रोचक बातें बताई जाये। इसलिए आज हम इन्हें लिख रहे है।
नमस्कार दोस्तों स्वागत है आपका हिन्दी इंटरनेट में, अगर आपको किसी और चीज के बारे में रोचक तथ्य जानने है तो आप हमें कमेंट करके जरूर बताया करें ताकि
आपको उसकी जानकारी मिल सके। तो शुरू करते है आपको हैरान करना।

बिल गेट्स के बारे में रोचक बातें जो आपको हैरान कर देंगी

1. बिल गेट्स का का असली नाम कुछ और है जो William Henry Gates है लेकिन आप उन्हें बिल गेट्स पुकार सकते हैं।
2. बिल की कहानी अंबानी परिवार जैसी नहीं है क्योंकि बिल पहले से ही बहुत अमीर पैदा हुए थे। क्योंकि इनके पिता एक वकील और इसके दादा के पास खुद का एक बैंक
था। ये शुरुआत से ही अमीर रहें हैं।
3. आज आपके बच्चे की उम्र क्या है या आपके सबसे छोटे भाई उम्र क्या है क्योंकि महज 13 साल की छोटी सी उम्र में ही इन्होंने कम्प्यूटर भाषाएँ सीख ली थी। जो अपनी
आप में एक गजब की बात है।
4. आपको ये तो पता ही होगा की बिल गेट्स को अपनी कम्प्यूटर प्रोग्रामिंग स कितना लगाव था। जिसके चलते वो कई क्लास में फेल भी हुए थे। उन्होंने अपने स्कूल के
कम्प्यूटर्स को बहुत बार हैक किया था। जिसके कारण उन्हें पनिसमेंट मिलती थी।
5. जब बिल केवल 17 साल के थे तो इन्होंने अपने ही स्कूल में एक टाइम टेबल के प्रोग्राम को बनाकर बेच दिया था। जिसके चलते उनको स्कूल के सभी बच्चे जानने लगे
थे। और इससे पहले इन्होंने एक गेम प्रोग्राम बनाया था।
6. बिल गेट्स भी और महान लोगों की तरह ही कॉलेज ड्रॉप आउट थे। उन्होंने अपने कॉलेज की पढाई बीच में ही छोड दी थी। लेकिन 2007 में उसी कॉलेज ने उन्हें डिग्री
से सम्मानित किया।
7. कॉलेज के दिनों में ही इन्होंने माइक्रोसॉफ्ट की स्थापना की और कॉलेज की पढाई छोड़ इस में लग गये।
8. बिल गेट्स आज इतने अमीर होने के बाद भी केवल 10 डालर की घडी पहनते है। इसके बारे में बताते हैं की ये उन्हें अच्छी लगती है।
9. बिल गेट्स को केवल एक ही
भाषा बोलनी आती है और वो इंगलिश है। उन्हें कभी कोई भाषा नहीं सीखी।
10. आपको पता बिल गेट्स एक बार जेल भी जा चूके हैं जिसका कारण ये था की उन्होंने जल्दबाजी में लाल बत्ती को पार कर लिया था।
11. बिल गेट्स हर सैकड़ में लगभग 12000 रूपये कमाते यानी की अगर एक वो 100 रूपये को जमीन से उठायें तो इससे कई गुणा ज्यादा तो उस वो उसको उठाने से
पहले ही कमा चुके होंगे। इनकी एक दिन की कमाई 100 करोड से भी ज्यादा है।
12. अगर बिल अपना एक अलग देश बनायें तो इनका बनाया देश विश्व का 37वां सबसे अमीर देश होगा। ये इतने अमीर इंसान हैं।
13. बिल गेट्स की 3 बच्चे है जिनमें से एक लडका और दो लडकी है। इनकी और से इन बच्चों को केवल 10 मिलियन डॉलर ही मिलेंगे।
14. बिल गेट्स दुनिया को पोलियो रहित बनाने में जुडें हुए है जिसमें की विश्व में से भारत को पोलियो रहित देश घोषित किया जा चूका है।
दोस्तों बिल गेट्स के बारे में इतनी गजब की बातें हैं की पढ़ते रात हो सकती है। और बातें कभी और। इसको अपने दोस्तों के साथ शेयर जरूर करें। धन्यवाद

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Sunday, 7 May 2017

The Power of Positive Thinking (Hindi Story) – सकारात्मक सोच की शक्ति

The Power of Positive Thinking (Hindi Story) – सकारात्मक सोच की शक्ति 

सकारात्मक सोच (Positive Thinking) के बिना जिंदगी अधूरी है| सकारात्मक सोच की शक्ति से घोर अन्धकार को भी आशा की किरणों (Lights of Hope) से रौशनी में बदला जा सकता है| हमारे विचारों पर हमारा स्वंय का नियंत्रण होता है इसलिए यह हमें ही तय करना होता है कि हमें सकारात्मक सोचना है या नकारात्मक|


हर विचार एक बीज है – Every Thought is a Seed|

हमारे पास दो तरह के बीज होते है सकारात्मक विचार (Positive) एंव नकारात्मक विचार (Negative Thoughts) है, जो आगे चलकर हमारे दृष्टिकोण एंव व्यवहार रुपी पेड़ का निर्धारण करता है| हम जैसा सोचते है वैसा बन जाते है (What we think we become) इसलिए कहा जाता है कि जैसे हमारे विचार होते है वैसा ही हमारा आचरण होता है|
यह हम पर निर्भर करता है कि हम अपने दिमाग रुपी जमीन में कौनसा बीज बौते है| थोड़ी सी चेतना एंव सावधानी से हम कांटेदार पेड़ को महकते फूलों के पेड़ में बदल सकते है|

डेविड एंव गोलियथ की कहानी

David and Goliath Bible Story in Hindi


बाइबिल की एक कहानी काफी प्रसिद्ध है| एक गाँव में गोलियथ नाम का एक ऱाक्षस था। उससे हर व्यक्ति डरता था एंव परेशान था। एक दिन डेविड नाम का भेंङ चराने वाला लङका उसी गाँव में आया जहाँ लोग राक्षस के आतंक से भयभीत थे। डेविड ने लोगों से कहा कि आप लोग इस राक्षस से लङते क्यों नही हो?


तब लोगों ने कहा – “वो इतना बङा है कि उसे मारा नही जा सकता”
डेविड ने कहा – “आप सही कह रहे है कि वह राक्षस बहुत बड़ा है| लेकिन बात ये नही है कि बङा होने की वजह से उसे मारा नही जा सकता, बल्कि हकीकत तो ये है कि वह इतना बङा है कि उस पर लगाया निशाना चूक ही नही सकता।“
फिर डेविड ने उस राक्षस को गुलेल से मार दिया। राक्षस वही था, लेकिन डेविड की सोच अलग थी।

कौनसे रंग का चश्मा पहना है? Positive or Negative

जिस तरह काले रंग का चश्मा पहनने पर हमें सब कुछ काला और लाल रंग का चश्मा पहनने पर हमें सब कुछ लाल ही दिखाई देता है उसी प्रकार नेगेटिव सोच से हमें अपने चारों ओर निराशा, दुःख और असंतोष ही दिखाई देगा और पॉजिटिव सोच से हमें आशा, खुशियाँ एंव संतोष ही नजर आएगा|
यह हम पर निर्भर करता है कि सकारात्मक चश्मे से इस दुनिया को देखते है या नकारात्मक चश्मे से| अगर हमने पॉजिटिव चश्मा पहना है तो हमें हर व्यक्ति अच्छा लगेगा और हम प्रत्येक व्यक्ति में कोई न कोई खूबी ढूँढ ही लेंगे लेकिन अगर हमने नकारात्मक चश्मा पहना है तो हम बुराइयाँ खोजने वाले कीड़े बन जाएंगे|

नकारात्मक से सकारात्मक की ओर:-

सकारात्मकता (Positivity) की शुरुआत आशा और विश्वास से होती है| किसी जगह पर चारों ओर अँधेरा है और कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा और वहां पर अगर हम एक छोटा सा दीपक जला देंगे तो उस दीपक में इतनी शक्ति है कि वह छोटा सा दीपक चारों ओर फैले अँधेरे को एक पल में दूर कर देगा| इसी तरह आशा की एक किरण सारे नकारात्मक विचारों को एक पल में मिटा सकती है|
नकारात्मकता को नकारात्मकता समाप्त नहीं कर सकती, नकारात्मकता को तो केवल सकारात्मकता ही समाप्त कर सकती है| इसीलिए जब भी कोई छोटा सा नकारात्मक विचार मन में आये उसे उसी पल सकारात्मक विचार में बदल देना चाहिए|
उदाहरण के लिए अगर किसी विद्यार्थी को परीक्षा से 20 दिन पहले अचानक ही यह विचार आता है कि वह इस बार परीक्षा (Exam) में उत्तीर्ण नहीं हो पाएगा तो उसके पास दो विकल्प है – या तो वह इस विचार को बार-बार दोहराए और धीरे-धीरे नकारात्मक पौधे को एक पेड़ बना दे या फिर उसी पल इस नेगेटिव विचार को पॉजिटिव विचार में बदल दे और सोचे कि कोई बात नहीं अभी भी परीक्षा में 20 दिन यानि 480 घंटे बाकि है और उसमें से वह 240 घंटे पूरे दृढ़ विश्वास के साथ मेहनत करेगा तो उसे उत्तीर्ण होने से कोई रोक नहीं सकता| अगर वह नेगेटिव विचार को सकारात्मक विचार में उसी पल बदल दे और अपने पॉजिटिव संकल्प को याद रखे तो निश्चित ही वह उत्तीर्ण होगा|
“सकारात्मक सोचना या न सोचना हमारे मन के नियंत्रण में है और हमारा मन हमारे नियन्त्रण में है| अगर हम अपने मन से नियंत्रण हटा लेंगे तो मन अपनी मर्जी करेगा और हमें पता भी नहीं चलेगा की कब हमारे मन में नकारात्मक पेड़ उग गए है|”

पढ़िए:  mango-tree - आम का पेड़

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Tuesday, 2 May 2017

आईटी प्रोफेशनल ने नौकरी छोड़ शुरू किया डेयरी स्टार्टअप

आईटी प्रोफेशनल ने नौकरी छोड़ शुरू किया डेयरी स्टार्टअप

संतोष डी सिंह को नौकरी छोड़, डेयरी के काम में मिला संतोष। डेयरी फार्मिंग का नहीं था कोई तजुर्बा, लेकिन फिर भी नौकरी छोड़ लग गये डेयरी फार्मिंग में और शुरू कर दिया डेयरी स्टार्टअप।


कुछ लोग अपनी धुन के पक्के होते हैं और संतोष डी सिंह उनमें से एक हैं, जिन्होने बैंगलौर से पोस्ट ग्रेजुएशन करने के बाद शुरूआती दस साल सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग में लगा दिये। इस दौरान संतोष ने डेल और अमेरिका ऑनलाइन के लिए काम किया। ये उस वक्त की बात है, जब भारत में सूचना प्रौद्योगिकी का काफी चलन था । उसी दौरान उन्हें काम के सिलसिले में दुनिया घूमने का भरपूर मौका मिला और उन्होंने ये जाना कि पैसा कमाने के और भी जरिये हैं नौकरी करने के सिवा।

गुलाबी शर्ट में संतोष डी सिंह
संतोष के पास डेयरी फार्मिंग से जुड़ा कोई अनुभव नहीं था। इसलिए उन्होने राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान में प्रशिक्षण के लिए अपना नामांकन करवा लिया।
संतोष डी सिंह ने अपने फैसले की जानकारी परिवार को देने के बाद कॉरपोरेट वर्ल्ड से नाता तोड़ लिया और अपने विचारों को मूर्त रूप देने में जुट गये। इस दौरान उन्होंने परियोजना प्रबंधन, प्रक्रिया में सुधार, कारोबार की समझ, विश्लेषण, और संसाधनों के प्रबंधन पर ध्यान देना शुरू किया, जो उन्होंने कॉरपोरेट वर्ल्ड में सालों की मेहनत के दौरान सीखा था।
संतोष के मुताबिक अप्रत्याशित इस दुनिया में उनका विचार था कि डेयरी फार्मिंग में स्थायित्व के साथ-साथ फायदा भी है। ये एक ऐसा काम था, जिसके लिए उनको ना सिर्फ एसी वाले कमरों से बाहर निकलना था, बल्कि उनके लिये ये एक उत्साहवर्धक अनुभव था। संतोष के पास डेयरी फार्मिंग से जुड़ा कोई अनुभव नहीं था। इसलिए उन्होंने राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान में प्रशिक्षण के लिए अपना नामांकन करवा लिया। शिक्षा के हिस्से के तौर पर संतोष डेयरी फार्मिंग से जुड़े कई अनुभव हासिल किये। इस दौरान उन्होंने सीखा कि गाय पालन कैसे किया जाता है। जिससे उनमें विश्वास आया, कि वे इस काम को लंबे समय तक कर सकते हैं। साथ ही उनको ये भी लगने लगा, कि ये वास्तव में एक बेहतरीन कारोबार है।


करीब छ: साल पहले संतोष ने अपने काम की शुरूआत की थी। शुरूआत में उन्होने अपनी तीन एकड़ जमीन में तीन गायों को रखा। इस दौरान उन्होंने दूध उत्पादन का काम शुरू किया, साथ ही गायों की देखभाल, उनको नहलाना, दूध निकालना और साफ सफाई का काम खुद ही किया। 
शुरूआत में संतोष ने 20 गायों से अपना काम शुरू करने का मन बनाया और उसी को ध्यान में रखते हुए बुनियादी ढांचा तैयार किया। लेकिन एनडीआरआई के एक ट्रेनर, जिनसे संतोष ने प्रशिक्षण लिया था उन्होंने उनको सलाह दी कि वे इस मामले में तकनीकी मदद के लिए नाबार्ड से जानकारी लें। संतोष ने जब नाबार्ड में इस संबंध में बातचीत की, तो उनको पता चला कि संसाधनों के सही इस्तेमाल से उनको लाभ हो सकता है, जरूरत है काम को बड़ा करने की और मवेशियों की संख्या को 100 तक करने की। इससे उनको हर रोज डेढ़ हजार लीटर दूध मिलेगा और एक अनुमान के मुताबिक उनका वार्षिक कारोबार 1 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।
पिछले कुछ सालों के दौरान डेयरी उत्पादों के दाम तेजी से चढ़े हैं और इस कारोबार में मार्जिन काफी अच्छा है। संतोष का आत्मविश्वास उस वक्त और बढ़ा जब नाबार्ड ने उनको डेयरी फार्मिंग के लिए सिल्वर मेडल से सम्मानित किया। जिसके बाद स्टेट बैंक ऑफ मैसूर उनके प्रोजेक्ट में निवेश के लिए तैयार हो गया। इस निवेश से उनके काम में तेजी आ गई और उन्होने 100 गायों को रखने के लिए आधारभूत ढांचे पर काम करना शुरू कर दिया। इसके साथ-साथ उनके मन में एक विचार और भी आ रहा था और वो विचार था, सूखे के हालात (जब हरा चारा मिलना मुश्किल होता है)।
जिस दौरान संतोष ने अपना डेयरी का काम शुरू किया उस दौरान बेमौसम बारिश होने से आसपास के इलाकों में सूखे जैसे हालात बन गये थे और हरे चारे के दाम दस गुणा तक बढ़ गये। हर रोज उत्पादन भी गिरने लगा और वो अपने निचले स्तर तक पहुंच गया। हालात इतने खराब हो गए कि संतोष को अपनी बचत का पैसा भी इस काम में लगाना पड़ा, लेकिन उन्होंने परिस्थितियों से घबरा कर अपने काम को रोका नहीं बल्कि जारी रखा और ऐसे हालात से निपटने के लिए उपाय ढूंढने शुरू कर दिये। उन्होंने फैसला लिया कि उनको हाइड्रोफॉनिक्स के जरिये हरा चारा पैदा करना चाहिए। जिसे पाने के लिए लागत भी व्यावसायिक रूप से कम पड़ती है।
संतोष को शुरूआती दिनों में मौसम का नकारात्मक प्रभाव अपने काम पर झेलना पड़ा, लेकिन अगले ही साल बारिश अच्छी हुई और संतोष दूध का उत्पादन बढ़ाने में सक्षम हो गये। अब संतोष अपने काम को बेहतर तरीके से कर पा रहे हैं और डेयरी उद्योग को एक नई दिशा देते हुए लोगों के सामने उदाहरण के रूप में खुद को खड़ा कर चुके हैं, कि कैसे एकआईटी प्रोफेशनल एसी कमरों और बिज़नेस क्लासहवाई यात्रा की नौकरी छोड़ डेयरी उद्योग की ओर मुड़ कर उसे भी बेहतरीन तरीके से करता है।

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